मैं राज्यसभा सांसद अपनी मेहनत से बनी, इसलिए नहीं दूंगी इस्तीफा
नई दिल्ली । राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के पीए विभव कुमार पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। उसके बाद बीते कुछ महीनों से स्वाति आप के खिलाफ लगातार बयान दे रही हैं। आप से उनकी नाराजगी जगजाहिर है। लेकिन अब सवाल उठा रहा हैं कि मालीवाल जिस पार्टी के कोटे से राज्यसभा पहुंची हैं, उससे इस्तीफा क्यों नहीं दे रही हैं?
इस्तीफा वाले सवाल पर मालीवाल ने कहा कि उन्हें कुर्सी का कोई मोह नहीं है। मालीवाल का कहना है कि वे हमेशा से जमीनी कार्यकर्ता रही हैं और रहेंगी। मालीवाल ने कहा कि साल 2006 में उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने झुग्गियों में काम करना शुरू किया और लगातार 7 साल तक झुग्गियों में काम करती रहीं। इस दौरान स्वाति ने बताया कि इंडिया अगैंस्ट करप्शन आंदोलन में वे सबसे युवा कोर कमेटी की सदस्य थीं। इसके बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के तौर पर एक लाख 70 हजार से ज्यादा केसों की सुनवाई की है। मालीवाल का कहना है कि वे इस्तीफा इसलिए नहीं दे रही हैं क्योंकि वहां आज जो भी हैं, अपनी मेहनत से बनी हैं। इसलिए इस्तीफा नहीं देंगी।
वहीं आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद मालीवाल ने केजरीवाल और मुख्यमंत्री आतिशी को निशाने पर लिया। स्वाति ने कहा कि एक नेता को, एक सांसद को काम करने के लिए जमीन पर जाना पड़ता है। लेकिन केजरीवाल और आतिशी एक प्रेसवार्ता करते हैं। मालीवाल ने इस दौरान केजरीवाल और आतिशी को जमीन पर उतरकर काम करने का चैलेंज भी दिया।
वहीं उनपर बीजेपी की एजेंट होने के आरोप पर मालीवाल ने कहा कि इनसे जो सवाल पूछता है, उस या बीजेपी का एजेंट कह देते हैं। इस दौरान राज्यसभा सांसद ने प्रशांत भूषण और शांति भूषण का उदाहरण देकर कहा कि उन्हें सवाल पूछने पर पार्टी से निकाल दिया गया, जबकि वे शुरू से पार्टी के सदस्य रहे थे।
'अब सिर्फ पीओके की बात होगी'— कारगिल वॉर मेमोरियल से राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को कड़ा अल्टीमेटम
पर्यटकों को इतिहास के नाम पर ठगा, नकली रोमन थिएटर का राज 10 साल बाद खुला
विश्व कप में भारतीय शूटिंग टीम का शानदार प्रदर्शन, ईशा सिंह को स्वर्ण और मनु भाकर को कांस्य
विश्वकप और एशियाड मिशन के लिए सख्त अनुशासन, सविता ने बताई टीम की खास तैयारी
'स्ट्रीट फाइटर' वाले बयान से गरमाई राजनीति, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया जवाब
केस वापस लेने की प्रक्रिया अटकी, अब तक नहीं आया सरकारी आदेश