जम्मू भूस्खलन: बुराड़ी के 16 में से 15 लोगों की मौत, केवल नन्हा अयांश बचा
नई दिल्ली।
जम्मू कश्मीर में 26 अगस्त को हुए भूस्खलन ने दिल्ली के बुराड़ी निवासी एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। धार्मिक आस्था और पारिवारिक उत्सव के तौर पर शुरू हुई वैष्णो देवी यात्रा, मौत की यात्रा में बदल गई। इस हादसे में 16 में से 15 लोगों की जान चली गई। परिवार का केवल दो वर्षीय अयांश जिंदा बच पाया है, जो फिलहाल आईसीयू में भर्ती है।
वैष्णो देवी यात्रा बनी मातम की कहानी
बुराड़ी निवासी राजा (40) अपनी पत्नी पिंकी (30), बेटियां दीपांशी (9) और आरोही (6), बड़े भाई अजय, मां रामकुमारी और रिश्तेदारों के साथ बेटे अयांश का मुंडन कराने वैष्णो देवी गए थे। परिवार के 16 सदस्य 23 अगस्त को दिल्ली से रवाना हुए थे। लौटने का कार्यक्रम 29 अगस्त था, लेकिन 26 अगस्त को हुए भूस्खलन ने सब कुछ बदल दिया।
हादसे में परिवार बिछड़ गया
जब पालकी में रामकुमारी और छोटी आरोही आगे बढ़ रही थीं, तभी बाकी सदस्य भूस्खलन की चपेट में आ गए। अंधेरे और अफरातफरी के बीच खबर आई कि पूरा परिवार लापता हो गया है। दिल्ली में मौजूद राजा का भतीजा यश टीवी पर खबरें देख रहा था। घायल रिश्तेदारों की झलक चैनलों पर देखी, लेकिन बाकी का कोई पता नहीं चला।
शवों की पहचान बनी पीड़ादायक
यश जब जम्मू पहुंचा तो उसे अस्पताल में शवों की कतार के बीच पहचान करनी पड़ी। पिंकी और दीपांशी को पहचानना आसान था, लेकिन राजा की पहचान उनके पैरों और चपटी उंगलियों से हुई। यश ने कहा, “उस क्षण मुझे यकीन हो गया कि यह चाचा ही हैं।”
घर में मातम और खामोशी
पूरे परिवार में अब केवल नन्हा अयांश बचा है। उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन बुराड़ी स्थित घर मातम में डूबा है। दादी रामकुमारी अपराधबोध और सदमे से टूटी हुई हैं। आरोही मासूमियत में समझ नहीं पा रही कि उसका परिवार क्यों नहीं लौटा।
अधूरा सपना, अधूरी ज़िंदगी
अजय का नया ई-रिक्शा, जो एक महीने पहले ही लोन पर लिया गया था, अब घर के बाहर खड़ा है। किस्तों की चिंता तो है ही, लेकिन सबसे बड़ा दर्द उस खालीपन का है जिसे यह हादसा पीछे छोड़ गया।
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