Bhopal Airport ने रचा इतिहास, राष्ट्रीय ग्राहक संतुष्टि सूचकांक में देशभर में पहला स्थान
Bhopal Airport: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित राजा भोज एयरपोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ग्राहक संतुष्टि सूचकांक (National Customer Satisfaction Index) सर्वे में भोपाल एयरपोर्ट को पूरे देश में पहला स्थान मिला है। यह उपलब्धि न केवल भोपाल शहर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इस सर्वे में भोपाल के साथ-साथ ग्वालियर और जबलपुर के हवाई अड्डों ने भी उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है।
राष्ट्रीय ग्राहक संतुष्टि सूचकांक सर्वे में मध्य प्रदेश के हवाई अड्डों का प्रदर्शन शानदार रहा। 15 लाख यात्रियों वाली श्रेणी में भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट ने पहला स्थान प्राप्त किया है। हाल के दिनों में एयरपोर्ट पर कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनमें डिजी यात्रा (Digi Yatra) के माध्यम से यात्रियों की एंट्री, बेहतर ग्राउंड हैंडलिंग, आसान चेक-इन प्रक्रिया और फ्लाइट स्क्रीन इंफॉर्मेशन सिस्टम शामिल हैं। इन सुविधाओं के चलते भोपाल एयरपोर्ट को 4.99 अंक मिले। वहीं, कम ट्रैफिक वाली कैटेगरी में खजुराहो एयरपोर्ट ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
राजा भोज एयरपोर्ट को पूरी तरह पैसेंजर फ्रेंडली बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। दिल्ली और मुंबई के जरिए विदेशों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट्स की सुविधा शुरू की गई है, जिसके लिए भोपाल एयरपोर्ट को पूरे अंक मिले हैं। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए शॉपिंग एरिया, मनी एक्सचेंज, 24×7 पार्किंग, प्रशिक्षित चेक-इन स्टाफ और बेहतर वेटिंग एरिया जैसी सुविधाओं को भी मजबूत किया गया है।
इस सर्वे में ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट को छठा और जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को सातवां स्थान मिला है। देशभर के 58 शहरों के हवाई अड्डों को शामिल करने वाले इस सर्वे में इंदौर एयरपोर्ट को शामिल नहीं किया गया। कुल मिलाकर, यह उपलब्धि मध्य प्रदेश के विमानन क्षेत्र में बढ़ते भरोसे और बेहतर यात्री अनुभव का प्रमाण मानी जा रही है।
सियासी घमासान तेज: NIA पर ममता बनर्जी का तीखा हमला
कोरोना का नया खतरा ‘सिकाडा’, वैक्सीन असर पर सवाल
बिना सामान लिए भुगतान, अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
IPL में CSK का ओपनिंग प्लान परफेक्ट नहीं, जानें वजह
पुदुचेरी में चुनावी सियासत गरम: विजय ने जनता को दी बड़ी गारंटियां
12,300 हमले भी नहीं तोड़ पाए ईरान: पश्चिम एशिया की जंग क्यों बनी चुनौती