दीपक से दीपक जलाना ठीक नहीं, गंगा जल प्लास्टिक बोतल में रखना भी घातक, आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां
सनातन धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्त्व है. नियम के साथ की गई पूजा आराधना न केवल मन को शांति प्रदान करती है बल्कि घर में सुख समृद्धि भी लाती है. कई बार लोग पूजा पाठ में कुछ बातों को अनदेखा कर देते हैं, जिसका बुरा असर भी हमारे दैनिक जीवन में देखने को मिलता है. अगर आप पूजा पाठ करने जा रहे हैं, तो ये गलती न करें. तभी पूजा पाठ का पूरा पुण्य आपको मिलेगा. शास्त्रों के अनुसार, भगवान की भक्ति में पवित्रता और सही विधि का होना अनिवार्य है. गलत तरीके से की गई पूजा का पूर्ण फल नहीं प्राप्त होता. घर के मंदिर से लेकर दीपक जलाने तक और भगवान को तिलक लगाने तक, हर काम के लिए कुछ खास धार्मिक नियम हैं. इन नियमों का पालन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
होगा उल्टा असर
कि अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा में कभी भी दीपक से दीपक को नहीं जलाना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार. ऐसा करने से दरिद्रता बढ़ती है. आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है. देवी-देवताओं को तिलक लगाने का भी एक तरीका है. भगवान को हमेशा अनामिका अंगुली से ही तिलक लगाना शुभ है. शास्त्रों में चंदन, कुमकुम और हल्दी के तिलक का सकारात्मक महत्त्व बताया गया है.
माफी भी मांगें
बिना आसन पर बैठे पूजा नहीं करनी चाहिए. इससे पूजा का फल नहीं मिलता. गंगाजल को भी कभी प्लास्टिक की बोतल में नहीं रखना चाहिए. हमेशा तांबे अथवा पीतल के बोतल में ही रखना शुभ है. रविवार एकादशी तिथि और शाम के समय तुलसी के पत्ते को न तोड़ें. पूजा के बाद शंख बजाना बेहद शुभ है. किसी भी पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना से करें पूजा खत्म होने के बाद भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि जाने-अनजाने में कोई गलती हुई हो तो माफ करें, ऐसा करने पर ही पूजा का पुण्य फल मिलेगा..
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