Ghuskhor Pandat Row: फिल्म निर्माता ने सुप्रीम कोर्ट में वापस लिया फिल्म का टाइटल, फिलहाल नया नाम तय नहीं
मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर छिड़े विवाद के बीच अब निर्माता नीरज पाडें ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना स्टेटमेंट दिया है। नीरज पांडे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फिल्म का नया शीर्षक अभी तय नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि हमने 'घुसखोर पंडित' का शीर्षक और प्रचार सामग्री वापस ले ली है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नीरज पांडे द्वारा 'घुसखोर पंडित' का शीर्षक वापस लेने संबंधी हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया और फिल्म के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया।
किसी धर्म, समुदाय या नागरिक की धार्मिक भावनाओं का अपमान नहीं करती फिल्म
शीर्ष न्यायालय में अपना हलफनामा दाखिल करते हुए नीरज पांडे ने कहा कि फिल्म किसी भी धर्म या समुदाय का अपमान नहीं करती या उन्हें निशाना नहीं बनाती है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि न तो मेरा और न ही मेरे प्रोडक्शन हाउस का भारत के किसी भी नागरिक की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण इरादा था। फिल्म किसी भी माध्यम से किसी भी धर्म, समुदाय या धार्मिक मान्यताओं का अपमान नहीं करती है।
प्रचार सामग्री पहले ही वापस हो चुकी है
फिल्म का टीजर जारी होने के बाद ही इसके टाइटल को लेकर विवाद उठा था। प्रचार सामग्री को लेकर निर्माता ने हलफनामे में कहा कि जनता से प्राप्त चिंताओं पर विचार करने के बाद 6 फरवरी को ही फिल्म से संबंधित प्रचार सामग्री वापस ले ली गई थी।साथ ही कोर्ट को ये भी बताया कि विवादित शीर्षक का अब इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। तय किया जाने वाला कोई भी नया शीर्षक पहले वाले टाइटल की तरह या उससे मिलता-जुलता भी नहीं होगा।हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जो एक आपराधिक जांच के इर्द-गिर्द घूमती है। यह किसी भी जाति, धर्म, समुदाय या संप्रदाय को भ्रष्ट के रूप में नहीं दिखाती।
कोर्ट ने मेकर्स को लगाई थी फटकार
यह हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 12 फरवरी को फिल्म निर्माताओं पर 'घुसखोर पंडित' शीर्षक को लेकर कड़ी फटकार लगाने के बाद आया है।सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल समाज के किसी वर्ग को बदनाम करने के लाइसेंस के रूप में नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने केंद्र सरकार, सीबीएफसी और फिल्म निर्माता को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि शीर्षक बदले बिना फिल्म को रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
याचिका में कही गई ये बात
ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा द्वारा अधिवक्ता डॉ. विनोद कुमार तिवारी के माध्यम से फिल्म को लेकर याचिका दायर की गई थी। इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का शीर्षक और कहानी जाति और धर्म आधारित रूढ़िवादिता को बढ़ावा देते हैं। साथ ही ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
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