तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल, कांग्रेस ने AIADMK समर्थन पर जताई नाराजगी
चेन्नई: तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक फिजां के बीच कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी 'तमिझगा वेत्री कड़गम' (TVK) और आगामी सरकार को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। कार्ति चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि यदि कोई दल स्वेच्छा से विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देना चाहता है, तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन टीवीके को एआईएडीएमके (AIADMK) के किसी भी विद्रोही गुट को साथ लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के रूप में विजय, जनता से मिले प्रचंड बहुमत के आधार पर अपने दम पर एक स्थिर और सशक्त सरकार चलाने में सक्षम हैं।
दशकों बाद कांग्रेस के लिए सत्ता में भागीदारी का मौका
राज्य की राजनीति में कांग्रेस की भूमिका पर चर्चा करते हुए कार्ति चिदंबरम ने एक नई संभावना की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि यदि टीवीके सरकार कांग्रेस के विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का प्रस्ताव देती है, तो पार्टी इसका खुले दिल से स्वागत करेगी। सांसद ने इसे कई दशकों के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस के लिए तमिलनाडु की सत्ता में सीधे तौर पर शामिल होने का एक ऐतिहासिक और बड़ा राजनीतिक अवसर करार दिया। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अब राज्य में केवल एक सहयोगी दल तक सीमित न रहकर शासन का हिस्सा बनने की दिशा में सकारात्मक सोच रख रही है।
DMK के साथ गठबंधन और 'विश्वासघात' के आरोपों पर सफाई
डीएमके (DMK) के साथ पुराने रिश्तों और चुनाव के बाद टीवीके को समर्थन देने के फैसले पर कार्ति चिदंबरम ने बेहद सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने 'विश्वासघात' जैसे शब्दों को खारिज करते हुए कहा कि चूंकि चुनाव के बाद डीएमके सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़े नहीं जुटा सकी, इसलिए जनादेश का सम्मान करते हुए टीवीके का साथ देना समय की मांग थी। उन्होंने स्वीकार किया कि हालांकि डीएमके के साथ वर्षों तक सफल गठबंधन रहा है और वे आज भी उस दल की ताकत का सम्मान करते हैं, लेकिन वर्तमान जनादेश विजय के पक्ष में है। उन्होंने यह भी माना कि गठबंधन बदलने की इस प्रक्रिया को और अधिक सम्मानजनक और बेहतर संवाद के साथ संभाला जा सकता था।
राष्ट्रीय राजनीति और NEET पर केंद्र को घेरा
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में कार्ति चिदंबरम ने भरोसा दिलाया कि राज्य स्तर पर समीकरण बदलने के बावजूद डीएमके और कांग्रेस दिल्ली में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के तहत मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने इसके लिए केरल और बंगाल का उदाहरण दिया जहां क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता के बावजूद विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट हैं। वहीं, शिक्षा के मुद्दे पर उन्होंने नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने के विचार को अव्यावहारिक बताते हुए मांग की कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया तय करने का अधिकार पूरी तरह राज्यों के पास होना चाहिए और केंद्र को इसमें हस्तक्षेप बंद करना चाहिए।
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