बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का विरोध, एनएसयूआई ने हवन कर किया संदेश
भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) द्वारा गुरुवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन के विरोध में विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर सद्बुद्धि हवन का आयोजन किया गया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली के नाम को हटाए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है, कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय प्रदेश की एक ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था है, जिसका नाम देश के महान स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में रखा गया था ऐसे में विश्वविद्यालय का नाम बदलना न केवल स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का अपमान है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक विरासत के साथ भी अन्याय है। रवि परमार ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा, शोध, विद्यार्थियों की समस्याओं तथा विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर ध्यान देने के बजाय नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाकर वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ियों एवं छात्रों से जुड़े मुद्दों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई करने के बजाय नाम परिवर्तन का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय पूरी तरह से छात्रों एवं शिक्षाविदों की भावनाओं के विपरीत है। जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली देश के स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित किया। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम को विश्वविद्यालय से हटाना इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के योगदान का अपमान है। एनएसयूआई इस निर्णय का लोकतांत्रिक तरीके से लगातार विरोध करेगी और छात्रों एवं नागरिकों के साथ मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाएगी। सद्बुद्धि हवन कार्यक्रम में अभिषेक द्विवेदी विकास कुमार राजवीर सिंह अनिमेष गोल्डी हर्ष पटेल विनोद प्रजापति शिखर सिंह आकांक्षित राय जितेन्द्र विश्वकर्मा अनुकूल परमार अंकित शर्मा अनुज शर्मा और एनएसयूआई के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को याद करते हुए उनके सम्मान में नारे लगाए गए और नाम परिवर्तन के निर्णय को वापस लेने की मांग की गई।
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