भोपाल मेट्रो का सफर होगा आसान, सिग्नलिंग सिस्टम तैयार; जल्द मिलेगी तेज और बेहतर सेवा
भोपाल। शहर में मेट्रो के धीमे संचालन को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। जल्द ही शहर की लाइफलाइन बनने जा रही मेट्रो एक बिल्कुल नए और हाईटेक अवतार में नजर आएगी। आगामी जुलाई महीने से आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के एक्टिवेट होते ही न सिर्फ मेट्रो ट्रेनों की रफ्तार में तेजी आएगी, बल्कि ट्रैक पर दौड़ने वाली ट्रेनों की तादाद और उनके आने-जाने के फेरों (फ्रीक्वेंसी) में भी बड़ा इजाफा होगा। मेट्रो प्रशासन इसके लिए एक नया और सुव्यवस्थित परिचालन टाइम-टेबल तैयार करने में जुट गया है।
अंतिम सेफ्टी क्लीयरेंस के लिए सीएमआरएस टीम करेगी दौरा
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सुरक्षा मानकों के अंतिम और औपचारिक मुआयने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की मुख्य टीम को न्योता भेजा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह विशेषज्ञ दल अगले हफ्ते भोपाल पहुंचकर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का बारीक निरीक्षण कर सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले असिस्टेंट कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम जमीनी स्तर पर अपनी प्रारंभिक जांच और सर्वे का काम सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है।
सुभाष नगर से एम्स रूट पर काम मुकम्मल
सुभाष नगर स्टेशन से लेकर एम्स स्टेशन तक के करीब सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग प्रणाली को लगाने और टेस्ट करने का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इस समय मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत कुल मिलाकर लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर इस आधुनिक सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में बुनियादी तकनीकी प्रणालियों के अभाव के कारण मेट्रो को एक सीमित दायरे और मैनुअल तरीके से चलाया जा रहा है, जिससे इसकी गति और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
सिंगल ट्रैक के झंझट से जल्द मिलेगी मुक्ति
फिलहाल आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह चालू न होने की मजबूरी में ट्रेनों की आवाजाही को केवल एक ही ट्रैक पर सीमित रखा गया है। यही कारण है कि स्टेशनों पर यात्रियों को अगली ट्रेन के आगमन के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी जो ट्रेन एक दिशा से रवाना होती है, वही वापस लौटते समय भी उसी पटरी का इस्तेमाल करती है, जिससे दूसरा समानांतर ट्रैक नियमित यातायात के लिए उपयोग नहीं आ पा रहा है। जुलाई से इस प्रणाली के शुरू होते ही दोनों ट्रैक पूरी क्षमता से काम करने लगेंगे।
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