धरना, मुलाकात और सियासी घमासान: 48 घंटे में कैसे बदला CJP आंदोलन?
दिल्ली: नीट परीक्षा में हुई धांधली के बाद सोशल मीडिया से उभरा 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) का आंदोलन बीते एक महीने से देश के राजनीतिक पटल पर छाया हुआ है। राजधानी की सड़कों पर विद्यार्थियों द्वारा निकाले गए शांतिपूर्ण संसद मार्च, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई और तत्पश्चात विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए तीव्र प्रदर्शन ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। विपक्षी खेमा केंद्र सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगा रहा है। प्रदर्शन की आंच प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने के बाद देर रात शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का स्पष्टीकरण सामने आया। इस बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
विपक्षी नेता का सरकार पर बड़ा हमला
पुलिस की कस्टडी से देर रात रिहा होने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी कर सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान छात्रों के मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की गई थी, जिस पर अध्यक्ष ने सरकार से अनुमति लेने की बात कही। राहुल गांधी के अनुसार, इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार इस विषय पर बात करने से कतरा रही है। इसी वजह से विपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे, छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग दोहराई।
अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक से मिले केंद्रीय मंत्री
छात्र आंदोलन के समर्थन में अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर उन्हें गुरुग्राम स्थानांतरित किया गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। डॉक्टरों के अनुसार वांगचुक का सीरम पोटेशियम स्तर कम है और वे पैन्साइटोपेनिया की समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उन्हें आईसीयू में निगरानी में रखा गया है।
प्रदर्शनकारियों के चैट और सीक्रेट ऐप पर पुलिस की नजर
संसद मार्च के दौरान हुई धक्का-मुक्की और हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। जांच एजेंसियां प्रदर्शनकारियों के बीच हुए कथित चैट और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए एक गुप्त ऐप की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चैट में इंटरनेट सेवा बंद होने की स्थिति से निपटने के वैकल्पिक इंतज़ामों और आंदोलन को उग्र बनाने से जुड़ी बातचीत के संकेत मिले हैं। फिलहाल पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह किसी पूर्व-नियोजित रणनीति का हिस्सा था या महज अफवाह।
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