कोटा। राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में  कैथून स्थित यह मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान माना जाता है जहाँ रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रतिमा लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी है। कहा जाता है कि रामराज्याभिषेक के बाद जब विभीषण भगवान शिव और हनुमान जी को कांवड़ में बैठाकर भ्रमण पर निकले थे, तब कैथून (प्राचीन कौथुनपुर) में विश्राम के दौरान शर्त के अनुसार वे यहीं स्थापित हो गए। मंदिर के वर्तमान ढांचे का निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराव उम्मेदसिंह प्रथम द्वारा कराया गया था। देश में यह इकलौता स्थान है जहाँ धुलेंडी के दिन हिरण्यकश्यप के पुतले के दहन की परंपरा निभाई जाती है।
राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में धुलेंडी के अवसर पर आयोजित होने वाले पारंपरिक सात दिवसीय विभीषण मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष मेले के मुख्य अतिथि प्रदेश के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर रहे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले 45 वर्षों से आयोजित हो रहे इस अनूठे मेले की शुरुआत मंत्री दिलावर द्वारा विभीषण मंदिर में विधि-विधान से पूजन और दर्शन के साथ हुई। इसके पश्चात विभिन्न मंदिरों से निकली देव विमान शोभायात्रा के मेला स्थल पहुँचने पर आतिशबाजी के बीच हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया गया। इस अवसर पर मदन दिलावर ने मेलों को समाज में आपसी मेल-जोल और संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने विभीषण जी को महान धर्मात्मा और प्रभु राम का परम भक्त बताते हुए कहा कि उन्होंने अधर्म के मार्ग को त्यागकर सत्य का साथ दिया था। मंत्री दिलावर ने वक्फ संशोधन कानून का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नए प्रावधानों के कारण ही विभीषण मंदिर की विवादित जमीन वापस हिंदू समाज को मिल सकी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार अब आबादी क्षेत्र के सभी मंदिरों की जमीन के पट्टे जारी करेगी। ये पट्टे किसी व्यक्ति के नाम न होकर मंदिर की मूर्ति के नाम होंगे, ताकि भविष्य में कोई भी इन संपत्तियों पर अवैध अतिक्रमण न कर सके। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी मंदिरों की जमीनों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और जल्द ही मालिकाना हक के पट्टे सौंप दिए जाएंगे।