स्कूल नहीं मिलने से नाराज छात्रों ने प्रशासन से लगाई गुहार
कटनी: मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे ‘स्कूल चले अभियान’ की जमीनी हकीकत कटनी जिले में कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। जहाँ एक ओर सरकार बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं बहोरीबंद विधानसभा के ग्राम चरगवा में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। गाँव में हाई स्कूल न होने से नाराज दर्जनों छात्र अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
हाथों में खाली बस्ता और 'शिक्षित भारत' का नारा
प्रदर्शन के दौरान छात्र अपने साथ खाली स्कूल बैग और हाथों में पंपलेट लेकर पहुँचे थे। इन पंपलेट्स पर ‘तुम हमें स्कूल दो, हम तुम्हें शिक्षित भारत देंगे’ जैसे नारे लिखे थे। छात्रों ने प्रतीकात्मक रूप से अपना खाली बस्ता अपर कलेक्टर को सौंपते हुए बताया कि गाँव में हाई स्कूल न होने के कारण उनके बस्ते में किताबों की जगह संघर्ष भरा हुआ है।
शिक्षा के लिए रोजाना 16 किलोमीटर का सफर
छात्रों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्हें पढ़ाई के लिए रोजाना अपने गाँव से करीब 8 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। वे सुबह 6 बजे घर से निकलते हैं और शाम को 6 बजे तक ही वापस लौट पाते हैं। आने-जाने के इस 16 किलोमीटर लंबे सफर की थकान और समय की बर्बादी के कारण बच्चे घर पर पढ़ाई के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे उनका शैक्षणिक स्तर गिर रहा है।
परिजनों की चिंता: कैसे पूरा होगा पढ़ाई का सपना?
अभिभावकों ने भी प्रशासन के सामने अपनी मजबूरी जाहिर की। परिजनों का कहना है कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं, लेकिन गाँव से इतनी दूर भेजना न केवल बच्चों के लिए थकाने वाला है, बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। अभिभावकों के अनुसार, यदि गाँव में जल्द हाई स्कूल नहीं खुला, तो कई बच्चों को मजबूरी में पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है।
बरसों पुरानी मांग, पर अब तक सिर्फ आश्वासन
स्थानीय समाजसेवी अनिल सिंह सेंगर ने बताया कि चरगवा के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से गाँव में हाई स्कूल खोलने की गुहार लगा रहे हैं। कई बार आवेदन देने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो छात्र और ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
कटनी कलेक्ट्रेट में हुए इस प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था के उन दावों की पोल खोल दी है, जो केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन मासूमों की पुकार पर कब तक संज्ञान लेता है।
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