बार-बार हो रही पेट की ऐंठन? जानें क्या है कारण और इलाज
गर्मियों के तेवर तीखे होते ही तेज धूप, अत्यधिक पसीने और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन के कारण पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसारने लगती हैं। इस मौसम में बड़ी संख्या में लोग पेट में मरोड़, भारीपन, एसिडिटी, अपच और तीखे दर्द की शिकायत करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मौसम में अत्यधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन, पानी की कमी (कम लिक्विड डाइट) और बाजार का दूषित व तैलीय खाना (जंक फूड) पेट के विकारों को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में हर छोटी समस्या के लिए एलोपैथिक दवाओं या एंटासिड का रुख करने के बजाय, रसोई में छिपे कुछ आसान और प्राकृतिक नुस्खों को अपनाकर स्थाई राहत पाई जा सकती है।
हमारे घरों के किचन में ऐसी कई प्राकृतिक चीजें मौजूद हैं जो पेट की आंतरिक परत को शीतलता प्रदान करने और मांसपेशियों के खिंचाव (ऐंठन) को शांत करने में अचूक असर दिखाती हैं। संतुलित आहार, प्रचुर मात्रा में जल का सेवन और पारंपरिक जड़ी-बूटियों का सही इस्तेमाल शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य (गट हेल्थ) को भी मजबूत बनाए रखता है। यदि आप भी इस समर सीजन में पेट की गड़बड़ी से आजिज आ चुके हैं, तो एक बेहद सरल घरेलू उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
पेट के विकारों के लिए रामबाण है 'सौंफ का पानी'
भारतीय मसालों में शुमार सौंफ (Fennel Seeds) औषधीय गुणों का खजाना है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और पाचक तत्व पाए जाते हैं। यह पेट में बनने वाली अवांछित गैस, खट्टी डकारें, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और दर्दनाक ऐंठन को रोकने में बेहद असरदार है। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण गर्मी के दिनों में इसका नियमित सेवन पेट की बढ़ी हुई गर्मी को शांत करता है।
सौंफ का काढ़ा/पानी तैयार करने की विधि:
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सबसे पहले एक साफ बर्तन में एक बड़ा चम्मच सौंफ निकाल लें।
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इसे एक बड़े कप साफ पानी में डालकर गैस पर उबलने के लिए रख दें।
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लगभग 5 से 7 मिनट तक मध्यम आंच पर अच्छी तरह पकाने के बाद गैस बंद कर दें।
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मिश्रण को छान लें और जब यह कमरे के तापमान पर आ जाए (हल्का गुनगुना या ठंडा हो जाए), तो इसे घूंट-घूंट करके पिएं।
सौंफ के पानी के नियमित सेवन के मुख्य स्वास्थ्य लाभ:
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पेट की अंदरूनी ऐंठन, मरोड़ और दर्द से तत्काल आराम मिलता है।
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गैस्ट्रिक जूस को नियंत्रित कर अपच और एसिडिटी की समस्या को जड़ से खत्म करता है।
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चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को दुरुस्त कर पाचन तंत्र को दीर्घकालिक मजबूती देता है।
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पेट और छाती में होने वाली जलन (हार्टबर्न) को शांत करने में सहायक है।
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शरीर के आंतरिक तापमान को नियंत्रित रख लू के प्रभाव से बचाता है।
इस घरेलू नुस्खे की किन्हें है सबसे ज्यादा जरूरत?
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ऐसे लोग जिन्हें गर्मी के महीनों में बार-बार पेट दर्द या दस्त (डायरिया) की शिकायत रहती है।
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जो लोग चाहकर भी अपनी दिनचर्या में मसालेदार और भारी भोजन से परहेज नहीं कर पाते।
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कम पानी पीने के कारण डिहाइड्रेशन, कब्ज और पेट में गैस के मलबे से जूझ रहे मरीज।
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