पिनगवां का ट्रैफिक अलर्ट: अतिक्रमण के चलते लंबा जाम लग रहा
पिनगवां। कस्बा पिनगवां का मुख्य मार्ग इन दिनों अतिक्रमण की चपेट में हैं, इसके चलते यहां रोजाना जाम की समस्या आम है। सड़क किनारे अवैध कब्जे और यातायात व्यवस्था की अनदेखी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग इस समस्या से काफी समय से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। जानकारी के अनुसार, मुख्य मार्ग पर रेहड़ी-पटरी वाले अपने ठेले सड़क के किनारे लगाते हैं, जिससे रास्ता संकरा हो जाता है।
वहीं, दुकानदार भी अपनी दुकानों के सामने बरामदों तक सामान फैलाकर अतिक्रमण कर लेते हैं। इसके अलावा ऑटो रिक्शा चालक भी सड़क पर ही खड़े होकर सवारियां बैठाते हैं, जिससे यातायात और अधिक बाधित हो जाता है। स्थानीय निवासी हिदायत खान, रफीक खान, लियाकत अली, सलीम खान, इमरान खान और सहरून खान का कहना है कि आए दिन लगने वाला जाम लोगों के लिए सिरदर्द बन चुका है। खासकर सुबह और शाम के समय स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाए और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं।
कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया गया है और दुकानदारों व रेहड़ी वालों को चेतावनी भी दी गई है, लेकिन इसके बावजूद वे बार-बार सड़क पर कब्जा कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -मनोज कुमार सरपंच प्रतिनिधि
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी राकेश कुमार कुशवाह ने ओपन इंडिया प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी जिले में बने 1500 तालाबों और नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों का मन की बात में किया उल्लेख
युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत