UP एनकाउंटर: लंबे समय से फरार आसिम अली का अंत, पुलिस ने दी बड़ी सफलता
कानपुर। उत्तर प्रदेश में खूंखार अपराधियों और डकैतों के खिलाफ चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत यूपी एसटीएफ (STF) को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात हो चुके 'छैमार गिरोह' के सबसे बड़े स्तंभ और एक लाख रुपये के इनामी डकैत आसिम अली उर्फ विक्की उर्फ नक्शे हसन उर्फ पेंदा को एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने मंगलवार तड़के एक भीषण मुठभेड़ (एन्काउंटर) में मार गिराया है। यह मुठभेड़ अंबेडकरनगर जिले के बेवाना थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई। इस आमने-सामने की खूनी जंग में एसटीएफ का एक जांबाज आरक्षी (कॉन्स्टेबल) भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अंधेरे में एसटीएफ की घेराबंदी, बाइक सवार डकैतों ने की ताबड़तोड़ फायरिंग
एसटीएफ गौतमबुद्धनगर (नोएडा) की विशेष टीम को मुखबिर और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए एक बेहद पुख्ता इनपुट मिला था कि अंतरराज्यीय छैमार गैंग के कुछ बेहद खतरनाक शूटर और डकैत अंबेडकरनगर के टांडा और बेवाना क्षेत्र में किसी बड़ी डकैती या हत्या की वारदात को अंजाम देने के इरादे से सक्रिय हैं। सूचना मिलते ही एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर बेवाना के कुशालपुर गांव के मुख्य चौराहे के पास रणनीतिक नाकेबंदी कर दी।
मंगलवार तड़के जब अंधेरा था, तब पुलिस टीम को एक तेज रफ्तार बाइक पर दो संदिग्ध लोग आते हुए दिखाई दिए। एसटीएफ के जवानों ने जब उन्हें रुकने का साफ इशारा किया, तो उन्होंने बाइक की रफ्तार बढ़ा दी और भागने का प्रयास करने लगे। एसटीएफ द्वारा पीछा किए जाने पर बाइक पर पीछे बैठे कुख्यात डकैत विक्की ने पुलिस टीम पर अत्याधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। डकैतों द्वारा चलाई गई एक गोली सीधे एसटीएफ इंस्पेक्टर सचिन मिश्रा की बुलेट प्रूफ जैकेट के बीचो-बीच जा धंसी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बची। वहीं, दूसरी गोली आरक्षी ओमनाथ चौहान के हाथ को चीरती हुई निकल गई, जिससे वे लहूलुहान हो गए।
जवाबी कार्रवाई में ढेर हुआ विक्की, साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार
खतरनाक अपराधियों द्वारा किए गए इस जानलेवा हमले के बाद एसटीएफ की टीम ने भी आत्मरक्षार्थ और जवाबी फायरिंग (क्रॉस फायरिंग) शुरू की। दोनों तरफ से हुई कई राउंड की भीषण गोलीबारी के बाद बाइक चला रहा दूसरा बदमाश गाड़ी छोड़कर खेतों की तरफ भाग निकला, जबकि पीछे बैठा एक लाख का इनामी डकैत विक्की पुलिस की गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ा।
मुठभेड़ थमने के बाद पुलिस टीम ने घायल विक्की को तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मुठभेड़ स्थल और आरोपी के पास से एक भारी बैग, वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, एक 32 बोर की विदेशी पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, तीन खोखे और एक 12 बोर की डरावनी पौनिया (देसी तमंचा) समेत 12 जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद हुए हैं।
जौनपुर के रोंगटे खड़े कर देने वाले 'ट्रिपल मर्डर' का मुख्य आरोपी था विक्की
मारा गया डकैत विक्की उर्फ आसिम अली उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए पिछले 12 सालों से एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। 23 अप्रैल 2014 को उसने अपने छैमार गिरोह के 7 अन्य खूंखार डकैतों के साथ जौनपुर जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र में स्थित रेनू सिंह नामक महिला के घर में धावा बोला था। इस दौरान डकैती का विरोध करने पर विक्की और उसके साथियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए रेनू सिंह की मासूम भतीजी स्वाति सिंह, जेठानी सुमन सिंह और जेठ शुभम सिंह को धारदार हथियारों और लाठियों से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था, जिनकी बाद में इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दिल दहला देने वाले 'ट्रिपल मर्डर' और डकैती कांड के बाद से ही विक्की लगातार फरार चल रहा था और आईजी रेंज द्वारा उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। विक्की के खिलाफ यूपी के 9 अलग-अलग जिलों (लखनऊ, सुल्तानपुर, फतेहपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, कौशंबी आदि) और हरियाणा में हत्या, डकैती, जबरन वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी के कुल 21 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।
कानपुर के मकनपुर का मूल निवासी था विक्की; भेष बदलकर दरगाह पर चढ़ाता था चादर
जांच में सामने आया है कि मुठभेड़ में मारा गया यह कुख्यात डकैत मूल रूप से कानपुर जिले के बिल्हौर थाना अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक कस्बे मकनपुर का रहने वाला था। हालांकि, वर्षों से उसका अपने पैतृक गांव से कोई सीधा वास्ता नहीं था। मकनपुर के स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि विक्की पिछले कई वर्षों से गांव नहीं आया था, लेकिन वह हर साल मकनपुर में लगने वाले दो प्रसिद्ध वार्षिक मेलों में अपनी पहचान और भेष बदलकर (कभी फकीर तो कभी व्यापारी बनकर) गुप्त रूप से आता था। वह वहां स्थित प्रसिद्ध मदार साहब की दरगाह पर चुपचाप चादर चढ़ाता और मन्नत मांगकर तुरंत रफूचक्कर हो जाता था। उसकी चालाकी का आलम यह था कि कस्बे के लोग तो दूर, स्थानीय पुलिस को भी कभी उसके आने-जाने की भनक तक नहीं लग पाती थी।
बावरिया गैंग से अलग होकर बना था खूंखार 'छैमार गिरोह'
अपराध जगत के जानकारों के मुताबिक, खानाबदोश और घुमंतू जीवन जीने वाले छैमार गिरोह के अपराधी पहले कुख्यात बावरिया गिरोह के लिए ही डकैती और रेकी का काम करते थे। बाद में बावरिया गैंग के मुख्य सरगना सलीम बावरिया से किसी बात पर हुए बड़े विवाद के बाद फाती उर्फ कदीम उर्फ पहलवान ने अलग होकर अपना एक नया स्वतंत्र 'छैमार गिरोह' खड़ा कर लिया। विक्की को सबसे पहले वर्ष 2006 में लखनऊ पुलिस ने स्मैक और चरस की तस्करी के आरोप में जेल भेजा था। जेल में ही विक्की की मुलाकात छैमार गिरोह के सरगना फाती से हुई और बाहर आते ही वह उसका सबसे वफादार शागिर्द और शूटर बन गया। इसके बाद उसने सिंहबाज उर्फ केसरी नाथ, फिरोज और बग्गा जैसे खूंखार अपराधियों के साथ मिलकर पूरे उत्तर भारत में डकैती और हत्याओं का तांडव शुरू कर दिया। बीते 9 मार्च 2025 को गिरोह का मुख्य सरगना फाती मथुरा में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था, जिसके बाद यह गिरोह कमजोर हो गया था और विक्की भूमिगत होकर गैंग को दोबारा खड़ा करने की फिराक में था।
तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम; बेवाना थाने में केस दर्ज
एसटीएफ के साथ हुई इस मुठभेड़ के बाद कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए मृत डकैत आसिम उर्फ विक्की के शव को राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर के मर्चुरी हाउस में रखवाया गया था। जहां शाम के समय तीन वरिष्ठ सर्जनों (डॉ. हुरेंद्र, डॉ. रवि राजभर और डॉ. दिनेश) के विशेष पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया गया। मानवाधिकार आयोग के नियमों के तहत इस पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की बाकायदा वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई है।
दूसरी ओर, बेवाना थाने में एसटीएफ के घायल इंस्पेक्टर सचिन कुमार की लिखित तहरीर पर मारे गए डकैत और उसके फरार साथी के खिलाफ सरकारी सेवा में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने (हाफ मर्डर) और अवैध असलहा रखने (आर्म्स एक्ट) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत एक नया आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। कानपुर के मकनपुर ग्राम प्रधान मजाहिर हुसैन के मुताबिक, विक्की का नाम सरकारी दस्तावेजों या परिवार रजिस्टर में कभी नहीं मिला, जिससे लगता है कि उसने पुलिस को भटकाने के लिए इस पते का इस्तेमाल किया था। फिलहाल, पुलिस कस्टडी में शव को सुरक्षित रखा गया है और बुधवार सुबह कानपुर से उसकी पत्नी के आने के बाद कानूनी तौर पर शव उन्हें सौंप दिया जाएगा। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से उत्तर प्रदेश के व्यापारियों और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है।
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